कोरोना काल में बच्चों को होने वाली मल्टीसिस्टम इनफ़्लामेट्री सिंड्रोम’ यानी एमआईएस-सी MIS-C बीमारी क्या है ? इसके लक्षण क्या हैं ? ये बीमारी क्यों हो रही है ? अब तक कितने बच्चों को ये बीमारी हुई है ? आज हम आपको एमआईएस-सी MIS-C बीमारी के बारे में पूरी जानकारी देंगे.

बच्चों में फ़ैल रहा MIS-C का खतरा, कैसे और क्यों हो रही है ये बीमारी ?

एमआईएस-सी किसको हो रहा है ?

बच्चों में होने वाला ‘मल्टीसिस्टम इनफ़्लामेट्री सिंड्रोम’ यानी एमआईएस-सी एक ऐसा गंभीर रोग है जिसे फ़िलहाल कोविड-19 (सार्स-कोविड-2) से जोड़कर देखा जा रहा है. नवजात एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अजीत कुमार ने बताया कि जैसे-जैसे लोग कोरोना वायरस से ठीक हो रहे हैं, बच्चों में एमआईएस-सी MIS-C के केस बढ़े हैं. हालांकि उन्होंने बताया कई ये कोरोना संक्रमण के बाद की परिस्थिति है. मतलब जिनको कोरोना हो कर ठीक हो चुके हैं उन्ही लोगों को ये बीमारी हो रही है.

दिल्ली में 200 मामले दर्ज—–

डॉक्टर अजीत ने कहा कि बच्चों में एमआईएस-सी MIS-C अभी रेयर है. लेकिन जिन बच्चों को ये हो रहा है, उसकी वजह का अब तक पता नहीं लगाया जा सका है. दिल्ली में अब तक इस बीमारी के लगभग 200 मामले दर्ज किये गए हैं. इस बारे में इंडियन अकेडमी ऑफ़ पीडिएट्रिक इंटेंसिव केयर ने बताया है कि पिछले कुछ दिनों में एमआईएस-सी के मामले बढ़े हैं. एमआईएस-सी के मामले अचानक बढ़ गए है जिससे 4 से 18 साल के वो बच्चे प्रभावित हैं जिन्हें कोरोना हो चुका है.

क्या हैं एमआईएस-सी के लक्षण ?

अमेरिकी संस्था सेंटर्स फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) मई 2020 से इस बीमारी का अध्ययन कर रही है. संस्था के अनुसार, इस बीमारी से बच्चों के हृदय, फ़ेफ़ड़े, गुर्दे, आँतें, मस्तिष्क और आँखों पर असर हो सकता है. एमआईएस-सी होने पर कुछ बच्चों में गर्दन के दर्द, शरीर पर दाने होना, आँखों का सुर्ख होना और लगातार थकान रहने जैसी शिकायतें भी देखी गई हैं. लेकिन इसके कई लक्षण हैं जैसे- तेज बुखार तीन दिनों से अधिक समय तक रहे, पेट (आंत) दर्द, उल्टी, दस्त, गर्दन में दर्द, चकत्ते होना, आंखों व जीभ में लाली, हाथों और पैरों की त्वचा में सूजन और छिल जाना, थकान महसूस होना, पेट में तेज दर्द, सांस लेने मे तकलीफ, तेज दिल की धड़कन, होंठ या नाखून का रंग पीला या नीला पड़ जाना.

जाँच में क्या पाया गया ?

मशहूर मेडिकल जर्नलों में से एक ‘द लैंसेट’ के अनुसार शोधकर्ताओं ने जाँच में पाया कि इस बीमारी के बाद लगभग 7 से 8 दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है. सभी बच्चों में बुखार पाया गया. क़रीब 73 प्रतिशत बच्चों को पेट दर्द या डायरिया की शिकायत थी और 68 प्रतिशत बच्चों को उल्टियाँ भी हो रही थीं. शोधकर्ताओं ने ये भी बताया कि एमआईएस-सी एक प्रोग्रेसिव (लगातार बढ़ने वाली) बीमारी है जिसकी शुरुआत छोटे-छोटे लक्षणों से होती है, पर बिना इलाज के यह बहुत तेज़ी से बढ़ती है और कुछ ही दिन में इससे कई अंग प्रभावित होकर एक साथ काम करना बंद कर सकते हैं.—–

22 प्रतिशत बच्चों को वेंटिलेटर की ज़रूरत

शोध में पाया गया कि इस बीमारी का शिकार हुए सभी बच्चों की सीआरपी और ईएसआर जैसी ख़ून की कुछ बुनियादी जाँचों के नतीजे ख़राब आये थे. इनके अलावा काफ़ी बच्चों की डी-डाइमर (ख़ून में थक्के जमने की जाँच) और हृदय से संबंधित जाँचों के नतीजे भी ख़राब पाये गए हैं. एमआईएस-सी का शिकार हुए 22 प्रतिशत बच्चों को वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ी है. एमआईएस-सी का शिकार हुए बच्चों में से 1.7 प्रतिशत की मौत हो गई है.

कैसे किया जा रहा इलाज ?

एमआईएस-सी एक घातक बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार के ज़रिये अधिकांश बच्चों को बचाया जा सकता है. मेडिकल जर्नल ‘द बीएमजे’ ने बताया कि एमआईएस-सी से पीड़ित ज़्यादातर बच्चों का इलाज ‘इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोब्यूलिन’ और स्टेरॉयड्स के ज़रिये किया जाता है. हालांकि, इस उपचार का बच्चों पर अनुकूल प्रभाव कितना है, इस बारे में अभी ज्यादा जानकारी किसी को नहीं है. लेकिन जो माँ-बाप या ख़ासतौर पर कोरोना संक्रमित हो चुके परिवार अपने बच्चों में एमआईएस-सी जैसे लक्षण पायें तो तुरंत डॉक्टर से इस बारे में सलाह ज़रूर लें. इलाज करवाने के बाद बच्चे ठीक हो जा रहे हैं.

जालंधर में 350 बच्चे MIS-C की गिरफ्त में

जालंधर जिले में इस साल अब तक करीब 350 बच्चे एमआइएस-सी की गिरफ्त में आ चुके हैं. जिसमें 35 बच्चों का सफल इलाज करने वाले डा. गुरदेव चौधरी ने बताया कि एमआइएस-सी बच्चों में कोरोना पाजिटिव (Cororna Positive) आने के छह से आठ सप्ताह बाद होता है. ये एक नई बीमारी है, इसलिए इसके बारे में सटीक जानकारी अभी तक नहीं है. अगर बच्चे को कोरोना हुआ है तो उसके ठीक होने के बाद भी निगरानी रखें. उसकी तबियत खराब होने पर तुरंत इलाज करवाएं.

कोरोना की तीसरी लहर खतरा बन सकती है

इंडियन अकेडमी ऑफ़ पीडिएट्रिक इंटेंसिव केयर की माने तो भारत में 26 प्रतिशत आबादी 14 साल की उम्र से कम है और इसमें से आधी आबादी की उम्र पाँच साल से कम है. जिससे कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर संभावित रूप से इस वर्ग (बच्चों) को ज़्यादा परेशान कर सकती है.

By Taniya Chauhan

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