असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद गरम है. असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा लगातार ट्वीट करके मिजोरम को विवाद को लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. सोमवार 26 जुलाई की हिंसा के बाद असम के सीएम ने देर रात एक वीडियो ट्वीट किया. मिजोरम की पुलिस पर गुंडों के साथ मिलकर हिंसा का जश्न मनाने का आरोप लगाया. उन्होंने ट्वीट किया-

“असम के 5 पुलिसवालों को मारने और कई लोगों को घायल करने के बाद, कुछ इस तरह से मिजोरम पुलिस और गुंडे जश्न मना रहे हैं. दुखद और भयानक.”

फिलहाल सरमा के इस ट्वीट पर मिजोरम की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. लेकिन केंद्र के दखल के बाद भी दोनों राज्यों में हालात कैसे हैं, इसका जवाब इस ट्वीट से मिल जाता है. इससे पहले 26 जुलाई को भी हिमंत बिस्व सरमा और मिजोरम के सीएम जोरमथंगा के बीच खूब ट्वीट वॉर हुई थी.

बिजली का खंभे बना विवाद का कारण?

असम और मिजोरम की सीमा पर अक्सर लोकल लोगों के बीच टकराव होता रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण है जमीन पर सीमाओं का साफ बंटवारा न होना. हालांकि 26 जुलाई को ये विवाद इतना बढ़ा कि दोनों राज्यों के सीएम ही ट्विटर पर भिड़ गए. एक तरफ थे मिजोरम के सीएम जोरमथंगा और दूसरी तरफ असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा. दोनों ने हिंसा के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया. पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मामले को सुलझाने की गुहार लगाई.

ये सब गृह मंत्री अमित शाह के 24-25 जुलाई को दो दिनों के पूर्वोत्तर दौरे के बाद हुआ. 25 जुलाई को शिलॉन्ग में एक बैठक हुई थी, जिसमें गृह मंत्री के साथ पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए. इस बैठक में भी सीमा विवाद का मुद्दा उछला था.

जहां तक बात ताजे विवाद की है, तो असम का आरोप है कि मुख्य शहर गुवाहाटी के खानापारा इलाके में उसकी जमीन पर मेघालय ने बिजली के खंभे लगाने की कोशिश की. इसके बाद तनाव बढ़ गया. असम के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब उन्हें खंभे लगाने की जानकारी मिली तो पुलिस और प्रशासन के अधिकारी खानापारा पहुंचे. मिजोरम के अधिकारियों से बात की गई. इसके बाद मिजोरम के अधिकारी बिजली के खंभे न लगाने को राजी हो गए. असम के अधिकारी का कहना है कि जिस जगह खंभे लगाए जा रहे हैं, वहां असम की तरफ से पहले ही बिजली मुहैया कराई जा रही है.

असम सरकार का क्या कहना है?

सोमवार 26 जुलाई की हिंसा को लेकर असम सरकार ने स्टेटमेंट जारी किया है. इसमें कहा है कि राज्य की सीमाओं की रक्षा करते हुए 5 पुलिसवालों ने जान दे दी, औऱ 60 लोग घायल हो गए. असम ने ये भी दावा किया है कि खुद पर हमला होने के बावजूद असम पुलिस-प्रशासन ने धैर्य का परिचय दिया, और मसले को बातचीत से हल करने की कोशिश की.

असम के सीएम हेमंत बिस्व सरमा 27 जुलाई की सुबह कछार जिले पहुंचे. यहां सबसे पहले वो सिलचर अस्पताल गए, जहां गोलीबारी में घायल जवान भर्ती हैं.

मिजोरम दूसरी ही कहानी बता रहा है

मिजोरम सरकार ने जो स्टेटमेंट जारी किया है, उसमें पूरी घटना के लिए असम को जिम्मेदार बताया गया है. स्टेटमेंट के अनुसार, असम पुलिस के अधिकारी अपने साथ तकरीबन 200 पुलिस जवानों को लेकर 26 जुलाई को मिजोरम की सीमा में घुस आए. उन्होंने सीमा पर तैनात सीआरपीएफ जवान के साथ जबरदस्ती की. आसपास के लोगों के इसका पता चला तो वो मौके पर जमा हो गए. इन निहत्थे लोगों पर असम पुलिस ने हमला कर दिया. आंसू गैस के गोले छोड़े गए. मामला सुलझाने के लिए एसपी कोलासिब और एक मजिस्ट्रेट पहुंचे. लेकिन असम की तरफ से आए लोग कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. शाम 4.50 बजे असम पुलिस ने आंसू गैस के गोलों के साथ गोलियां चलाना भी शुरू कर दिया. इसके जवाब में मिजोरम पुलिस ने भी फायरिंग की. ये पूरी घटना दुखद है. लेकिन ये सब असम की तरफ से शुरू किया गया.

बता दें कि दोनों राज्यों की सीमा पर जून के महीने में भी झड़प हुई थी. हालांकि इस बार हिंसा का मामला गरमा गया है. देखना ये है कि केंद्र सरकार दखल देकर मामले को कैसे शांत कराती है.

By Taniya Chauhan

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