जब सत्ताएं समाज में कोई बदलाव नहीं ला पाती तो नाम बदलने लगती हैं..नाकामी छिपाने के लिए थालियां बजवा दी जाती हैं..दीपक जलवाए दिए जाते हैं..मोदी जी ने राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड का नाम बदलकर (RENAMED)…मेजर ध्यान चंद खेल रत्न अवार्ण कर दिया है..ठीक बात है राजीव गांधी कोई महापुरुष थे क्या..नेता थे एक पूर्व प्रधानमंत्री ही थे..नाम महापुरुषों ने नाम पर ही रखे जाने चाहिए..लेकिन एक बात समझ में नहीं आती जिन प्रधानमंत्री मोदी ने जनता की आवाज पर राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ण का नाम बदल दिया..उन्हीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के महापुरुष…लौह पुरुष कहलाने वाले..सरदार वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम का नाम अपने नाम पर क्यों कर लिया..

अगर पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर किसी अवार्ण का नाम नहीं हो सकता तो वर्तमान प्रधानमंत्री को कोई अधिकार नहीं है..कि हमारे महापुरुष भारत माता की शान सरदार वल्लभ भाई पटेल को हटाकर अपने नाम से क्रिकेट स्टेडियम का नाम रख लें..जो जो लोग सहमत हों..कमेंट करके बताएं कि क्या सरदार वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम का नाम नरेंद्र मोदी स्टेडियम कर लेना सही है..क्या नरेंद्र मोदी सरदार पटेल के सामने कहीं भी टिकते हैं..क्या सरदार पटेल का नाम हटाकर नरेंद्र मोदी स्टेडियम करना चाहिए था..कमेंट करके बताईये क्योंकि मोदी जी कहते हैं जनता की भारी मांग पर उन्होंने राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ण का नाम बदला (RENAMED) है..आप मांग कीजिए आप जनता है..हो सकता है नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम का नाम वापस सरदार पटेल के नाम पर रख दिया जाए..जब जब ये बात उठती है तब तब बीजेपी कहती है कि मोटेरा में मौजूद क्रिकेट स्टेडियम का नाम सरदार पटेल स्टेडियम नहीं था..लेकिन बचपन से लेकर देश के हर बच्चे और यहां तक कि प्रसार भारती ने भी उसे सरदार पटेल स्टेडियम ही जाना है..और माना है..

खादी कैलेंडर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधा की फोटो हटाकर मोदी जी ने अपनी फोटो लगा ली..लगानी चाहिए थी क्या..नेताओं और प्रधानमंत्रियों के नाम पर देश के चौराहों और एयरपोर्टों का नाम नहीं होना चाहिए (RENAMED) ..लेकिन पहले खुद में भी सुधार करना पड़ेगा..महापुरुषों से नाम छीनेने की प्रथा बंद करनी पड़ेगी..मुझे बेहद खुशी है कि हॉकी के जादूगर को राजनीतिक कारणों से ही सही सम्मान दिया गया..इसके लिए मोदी जी धन्यवाद के पात्र हैं लेकिन सरदार पटेल और गांधी जी का सम्नान रखना चाहिए..खादी कैलेंडर से गांधी जी की फोटो हटाकर मोदी जी वहां खुद चरखा चलाने लगे..आप सोचिए क्या सोचकर और किस स्तर पर सोचकर बापू की फोटो हटाकर वहां प्रधानमंत्री ने चरखा चलाने हुए अपनी फोटो लगाई होगी…पूर्व प्रधानमंत्री के नाम से अगर खेल अवार्ड नहीं हो सकता तो वर्तामान प्रधानमंत्री को गांधी और पटेल के नाम और तस्वीरों को हटाने का कोई नौतिक हक नहीं है..बाकी आपके पास पावर है..कुछ भी लिख दीजिए..कुछ भी हटा दीजिए..

मीठा मीठा गप गप और कड़वा कड़वा थू थू नहीं होना चाहिए..जनता की डिमांड पर मोदी जी ने खेल पुरस्कार का नाम बदला (RENAMED) है अब उनके अपने गुजरात के पूर्व सीएम शंकर सिंह वाघेला कह रहे हैं कि उनके राज्य में सरदार पटेल स्टेडियम का नाम मोदी जी ने अपने नाम पर कर लिया है उसको दोबारा सरदार पटेल स्टेडिय के नाम पर किया जाए..डिंमांड हो रही है मोदी जी को कहना चाहिए कि मैं मायावती नहीं हूं..जो अपनी मूर्ति या अपने नाम से अपनी ही सरकार में चीजों के नाम रखवाउं किसी महापुरुष के नाम पर रखो मेरे नाम पर मत रखो लेकिन मोदी जी ने कुछ नहीं कहा..

देखिए मैं हमेशा सही चीज का समर्थन करती हूं..मोदी जी ने देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड का नाम बदल (RENAMED) दिया गया है…नये पुरस्कार को हॉकी के जादूगर..3 बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता मेजर ध्यानचंद जी के नाम से जाना जाएगा…ये उनको सच्ची श्रद्धांजलि है..लेकिन सरदार पटेल ने आपका कुछ बिगाड़ा नहीं था..गांधी जी का चरखा कैलेंडर में उनको ही चलाने देते..

जो देश में हो रहा है वही उत्तर प्रदेश में हो रहा है..इकाना स्टेडियम का नाम बदलकर (RENAMED) अटल विहारी वाजपेयी स्टेडियम कर दिया गया..हजरतगंज चौराहे का नाम अटल चौराहा कर दिया गया..इलाबाद का नाम बदला..फैजाबाद का नाम बदला..मुगलसराय का नाम बदला..बदलाव प्रकृति का नियम है..बदलते रहना चाहिए..राजीव गांधी और इंदिरा गांधी ने नाम पर बेहिसाब जगहों के नाम हैं..यहां तक कि इंदिरा गांधी हवाई अड्डे से उड़ते हैं तो राजीव गांधी हवाई अड्डे पर लैंड करते हैं..मेरी बातें इधर वालों को भी बुरी लगती हैं और उधर वालों को भी..सच की यही दिक्कत है..लेकिन कितनी भी दिक्कत हो सच बोलती रहूंगी..क्योंकि टीवी खोलकर जहां से आप सच सुनना चाहते हैं..उनके पास उनका अपना सच है..इसलिए दोनों तरफ का सच जानिए..सुनिए देखिए परखिए..सही जानकारी जुटाईये..

Disclamer- उपर्योक्त लेख वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

By Taniya Chauhan

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