जिसके खेल में कभी भारत का परचम लहराता था। विश्व पटल पर हॉकी भारत की दूसरी पहचान बन गया था। ओलिंपिक में आठ गोल्ड मेडल आए थे। उस खेल में अगर भयानक गिरावट के 41 बाद टीम टॉप-4 में पहुंचती है तो देशवासियों का भावुक होना लाजिमी है।

नई दिल्ली
किताबों में भले ही हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल कहलाता हो, लेकिन सवा सौ करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले देश में क्रिकेट लोगों के लहू में बहता है। कुछ लोग इसकी एक वजह बड़े टूर्नामेंट में भारतीय हॉकी टीम का खराब प्रदर्शन भी कहते हैं।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने रविवार को इतिहास कायम किया। 1972 के म्यूनिख ओलिंपिक के बाद पहली बार टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई है। अब बारी महिलाओं की है। अपने साथियों की जीत से प्रेरणा लेकर आज महिला टीम क्वॉर्टर फाइनल में उतरेगी।

रानी रामपाल की कप्तानी वाली टीम पहली बार क्वॉर्टर फाइनल में पहुंच कर पहले ही इतिहास रच चुकी है। लेकिन अब उसकी कोशिश इसे बेहतर करने की होगी। महिला टीम का ओलिंपिक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1980 में मॉस्को में रहा था जब वह छह टीमों में चौथे स्थान पर रही थी।

वैसे बुनियादी सुविधाओं का अभाव। खेल संघ का उदासीन रवैया और राजनीति भी हॉकी को पीछे धकेलने में आगे रही। अब तोक्यो ओलिंपिक में एक नई उम्मीद जागी है क्योंकि चार दशक बाद पहली बार टीम इंडिया टॉप-4 में पहुंची। इस ऐतिहासिक लम्हे का आंखों देखा हाल सुनाने वाले कमेंटेटर्स भी खुद की भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए।

रोने लगे सोनी के ब्रॉडकास्टर्स
देश में ओलिंपिक खेलों का प्रसारण सोनी नेटवर्क कर रहा है। अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी इसकी लाइव कमेंट्री होती है। ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में इसका जिम्मा सुनील तनेजा संभाल रहे थे, वही सुनील जिन्हें भारतीय खेलों की आवाज कहा जाता है। उनका साथ सिद्धार्थ पांडेय निभा रहे थे। जैसे ही फाइनल सिटी बजी। दोनों कमेंटेटर्स अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। आंखों से टपटप आंसू बह रहे थे। दोनों एक दूसरे का ढांढस बांधते रहे। फफक-फफक कर रोते हुए मैच का हाल सुनाते रहे।

ये जीत ऐतिहासिक है
युवा खिलाड़ियों से सजी भारत की पुरुष हॉकी टीम रविवार को खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ब्रिटेन को 3-1 से हराकर चार दशक बाद पहली बार टॉप-4 में एंट्री बनाई। 41 साल के अंतराल के बाद इस मुकाम में पहुंचने वाली भारतीय टीम के लिए दिलप्रीत सिंह ने सातवें, गुरजंत सिंह ने 16वें और हार्दिक सिंह ने 57वें मिनट में गोल किया। ब्रिटेन के लिए एकमात्र गोल सैमुएल वार्ड ने 45वें मिनट में किया। सेमीफाइनल में भारत का सामना विश्व चैम्पियन बेल्जियम से होगा, जिसने तीसरे क्वार्टर फाइनल मैच में स्पेन को 3-1 से हराया।

1980 के बाद पहली बार खेलेगा फाइनल?
बेल्जियम को हराकर भारत 1980 के बाद पहली बार फाइनल में पहुंचना चाहेगा, जब उसने स्पेन को हराकर अपना आठवां स्वर्ण पदक जीता था। बेल्जियम के हाथों हार के बाद भारत को फिर से कांस्य पदक के लिए भिड़ना होगा। भारत अगर जीत हासिल करने में सफल रहा तो उसका सामना ऑस्ट्रेलिया या जर्मनी के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। जर्मनी ने जहां दिन के पहले मुकाबले में ओलंपिक चैम्पियन अर्जेंटीना को 3-1 से हराया वहीं ऑस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड्स को पेनाल्टी शूटआउट के बाद 3-0 से हराया।

By Taniya Chauhan

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